मोदी सरकार जेन-जी से डरी हुई, इसीलिए ज्ञानेश कुमार ने नए वोटरों का पंजीकरण रोका : रागिनी नायक
रागिनी नायक बोलीं- पोल खुलने पर चुनाव आयोग लीपापोती के लिए युवा पंजीकरण शिविर आयोजित कर रहा

नई दिल्ली : कांग्रेस ने चुनाव आयोग द्वारा बीते दो वर्षों से नए युवा मतदाताओं का पंजीकरण रोके रखने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि मोदी सरकार जेन-जी से डरी हुई है, इसीलिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एसएसआर (स्पेशल समरी रिवीजन) जैसी वैधानिक प्रक्रियाओं को ठप करने का काम किया।
पार्टी ने कहा है कि इस मामले में सच्चाई सामने आने के बाद अब चुनाव आयोग अपनी इज्जत बचाने के लिए आनन-फानन में युवा पंजीकरण शिविर लगाने के नाम पर लीपापोती कर रहा है।
कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी प्रवक्ता डॉ. रागिनी नायक बसोया ने फॉर्म-6 में अनधिकृत बदलाव के जरिए पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं के पंजीकरण में बाधाएं खड़ी करने पर भी चुनाव आयोग को घेरा। उन्होंने बताया कि हर साल एसएसआर के जरिए 18 साल की आयु पूरी करने वाले युवाओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े जाते हैं। लेकिन 2024 से इस प्रक्रिया को रोके रखा गया, ताकि युवा मतदाता बनने से वंचित रह जाएं। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार मोदी सरकार के इशारे पर न केवल ‘वोट चोरी’ करा रहे हैं, बल्कि ‘जेन-जी’ के मताधिकार के साथ बड़ी हेराफेरी भी कर रहे हैं।
डॉ. बसोया ने याद दिलाया कि दिसंबर 1988 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 326 में संशोधन कर मतदान की न्यूनतम आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष कर दी थी। उन्होंने कहा कि इसके ठीक विपरीत आज वर्तमान मोदी सरकार देश के युवाओं, छात्रों व जेन-जी से डरी हुई है और उनका नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं करना चाहती।
कांग्रेस प्रवक्ता ने फॉर्म-6 में असंवैधानिक तरीके से किए गए बदलाव को लेकर भी मुख्य चुनाव आयुक्त को घेरा। उन्होंने बताया कि जुलाई, 2026 में चुपके से फॉर्म-6 ए में एक खंड जोड़ दिया गया जिसके तहत पहली बार मतदाता बनने वाले युवा के लिए यह बताना अनिवार्य कर दिया गया कि उसके माता-पिता या दादा-दादी पिछले एसआईआर में कहां पंजीकृत थे। डॉ. बसोया ने कहा कि यह बदलाव रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1950 के तहत चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। केवल केंद्र सरकार संसद को सूचना देकर नियमों में संशोधन कर सकती है। उन्होंने कहा कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने लिखित रूप से इस बदलाव को गैरकानूनी और अनधिकृत बताया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नए मतदाताओं के लिए प्रक्रिया आसान बनानी चाहिए, न कि बाधाएं खड़ी करनी चाहिए।
डॉ. बसोया ने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट के 1995 के फैसले के अनुसार चुनाव आयोग बहुमत से चलता है। उन्होंने इसे दुखद बताया कि अल्पमत में चल रहे आयोग ने एसआईआर के तीसरे चरण तक करीब 13 करोड़ 80 लाख मतदाताओं को प्रक्रिया से बाहर कर दिया है।
डॉ. बसोया ने तंज कसते हुए कहा कि मेरठ और वाराणसी में ज्ञानेश कुमार ने अपने कार्यक्रम भी स्थगित कर दिए हैं, क्योंकि अब वह मुंह दिखाने लायक नहीं बचे हैं। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार के पास अब दो ही रास्ते हैं, वे इस्तीफा दें या लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सुझाव के मुताबिक सरकारी गवाह बनकर देश को वोट चोरी के असली साजिशकर्ताओं के बारे में बताएं।
मोदी सरकार को युवा विरोधी बताते हुए कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी बताया कि डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में शिक्षा का बजट कुल बजट का 4.5 प्रतिशत था, जो अब घटकर लगभग 2.5 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में तेजी से शिक्षा का निजीकरण हुआ, परीक्षाओं के पेपर लीक हुए और करोड़ों छात्रों का भविष्य अंधकार में चला गया। उन्होंने युवाओं के ऊपर जंतर-मंतर पर पैलेट गन, आंसू गैस, नुकीली लाठियां चलाए जाने का भी उल्लेख किया।



