आईआरआईटीएम, लखनऊ एवं एनएसीआइन, लखनऊ के मध्य क्षमता निर्माण, शैक्षणिक सहयोग एवं अनुसंधान को सुदृढ़ करने हेतु समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर

लखनऊ : भारतीय रेल परिवहन प्रबंधन संस्थान (आईआरआईटीएम), लखनऊ तथा राष्ट्रीय सीमा शुल्क, अप्रत्यक्ष कर एवं नारकोटिक्स अकादमी (एनएसीआइन), आंचलिक परिसर, लखनऊ के मध्य आज नैसिन, आंचलिक परिसर, लखनऊ में क्षमता निर्माण, सुशासन, लोक प्रशासन, शैक्षणिक आदान-प्रदान तथा अनुसंधान के क्षेत्र में संस्थागत सहयोग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस एमओयू पर सुश्री नेहा लाल, अपर निदेशक, एनएसीआइन, आंचलिक परिसर, लखनऊ तथा कृष्णा तिवारी, प्रो. (प्रशासन) , आईआरआईटीएम, लखनऊ ने वेद प्रकाश शुक्ला, प्रधान अपर महानिदेशक, एनएसीआइन की गरिमामयी उपस्थिति में हस्ताक्षर किए।
यह एमओयू क्षमता निर्माण, संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, संकाय आदान-प्रदान कार्यक्रमों, मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत विभिन्न पहलों, संसाधनों के साझा उपयोग तथा संयुक्त प्रशिक्षण आवश्यकता आकलन (Training Needs Assessment – TNA) एवं पाठ्यक्रम विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, सुशासन, लोक नीति, प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन, खरीद (प्रोक्योरमेंट) तथा अन्य पारस्परिक रुचि के विषयों पर व्याख्यान, संगोष्ठी, कार्यशाला, पैनल चर्चा, सेमिनार, वेबिनार एवं अन्य शैक्षणिक तथा व्यावसायिक विकास कार्यक्रमों के संयुक्त आयोजन का भी प्रावधान किया गया है।
यह सहयोग भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge Systems) पर आधारित अनुसंधान को प्रोत्साहित करने, दोनों संस्थानों की विशेषज्ञता एवं आधारभूत संरचना के साझा उपयोग तथा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं एवं वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप नवोन्मेषी प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संयुक्त विकास को भी बढ़ावा देगा।
*भारतीय रेलवे परिवहन प्रबंधन संस्थान (आईआरआईटीएम) के महानिदेशक रंजन प्रकाश ठाकुर* ने इस समझौता ज्ञापन (एमओयू) को देश के दो प्रमुख सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों के मध्य सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी संस्थागत क्षमता निर्माण को सशक्त बनाएगी, ज्ञान एवं सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करेगी तथा प्रशिक्षण पद्धतियों में नवाचार को बढ़ावा देगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सहयोग ‘विकसित भारत’ एवं ‘मिशन कर्मयोगी’ के उद्देश्यों के अनुरूप सक्षम, दक्ष एवं भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार मानव संसाधन के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
यह एमओयू प्रारंभिक रूप से तीन वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा तथा इससे दोनों संस्थानों के मध्य शैक्षणिक, प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संबंधी विविध गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ विभिन्न सरकारी संगठनों में क्षमता निर्माण को भी नई दिशा प्राप्त होगी।



