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नोएडा के संघर्षरत मजदूरों के साथ सीपीआई(एम) की एकजुटता, जेल में बंद मजदूरों से मिलने की अनुमति न देने पर रोष

लखनऊ : सीपीआई(एम) के महासचिव कॉमरेड एम. ए. बेबी के नेतृत्व में पार्टी के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने आज नोएडा में उन मजदूरों से मुलाकात की जिन्हें अप्रैल में हुए मजदूर आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किया गया था और लगभग एक माह जेल में रहने के बाद हाल ही में जमानत पर रिहा किया गया है। प्रतिनिधिमंडल ने पाया कि रिहा होने के बावजूद इन मजदूरों को उनकी नौकरियों से निकाला जा चुका है और वे गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।

पीड़ित मजदूरों ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि पुलिस हिरासत में उनके साथ बर्बर मारपीट की गई, झूठे सबूत गढ़कर कई संगीन धाराओं में फंसाया गया और मजदूर आंदोलन को कुचलने की सुनियोजित साजिश रची गई।

प्रतिनिधिमंडल में पोलित ब्यूरो सदस्य कॉमरेड अरुण, कॉमरेड तपन सेन, राज्यसभा सांसद डॉ. वी. शिवदासन, पी. वी. अनियन, सीपीआई(एम) दिल्ली राज्य सचिवमंडल सदस्य राजीव कुँवर तथा नोएडा पार्टी सचिव राम सागर, सीटू नेता गंगेश्वर दत्त शर्मा, मुकेश कुमार राघव, रामस्वारथ, भरत डेंजर, जनवादी महिला समिति की नेता रेखा चौहान सहित अन्य साथी शामिल थे।

मुख्य बिंदु:
1. फबसट्रेक्ट क्लोथिंग के मजदूरों से संवाद: अप्रैल के आंदोलन के बाद नोएडा की गार्मेंट्स फैक्ट्री फबसट्रेक्ट क्लोथिंग के 50 से अधिक मजदूर ट्रेड यूनियन आंदोलन से जुड़े हैं। उन्होंने वेतन कटौती, जबरन ओवरटाइम और यूनियन बनाने पर प्रबंधन द्वारा धमकाने की शिकायतें रखीं। 2. ऑटोमोबाइल सेक्टर के मजदूरों की व्यथा: प्रतिनिधिमंडल ने वाइब्रेकॉस्टिक इंडिया और मदरसन के मजदूर प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। मजदूरों ने बताया कि प्रबंधन नियमित रूप से संगठित होने के संवैधानिक अधिकार का हनन करता है और नेतृत्वकारी भूमिका निभाने वाले श्रमिकों को तुरंत नौकरी से निकाल दिया जाता है। 3. जेल में बंद मजदूरों से मिलने पर रोक: प्रतिनिधिमंडल ने उन मजदूरों से मिलने का प्रयास किया जो अभी भी अन्यायपूर्ण तरीके से जेल में बंद हैं, परंतु जेल प्रशासन ने “उच्च अधिकारियों के आदेश” का हवाला देकर अनुमति देने से इनकार कर दिया। सांसद डॉ. वी. शिवदासन के माध्यम से कई दिनों से किए जा रहे प्रयासों को भी अस्वीकार कर दिया गया।
महासचिव कॉमरेड एम. ए. बेबी का बयान:
“उत्तर प्रदेश सरकार ने मजदूरों पर पुलिसिया हिंसा करवाई और झूठे मुकदमे दर्ज किए। जेल में बंद मजदूरों से मिलने की अनुमति न देना और उन्हें कानूनी सहायता से वंचित रखना मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। सरकार का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया संदेह पैदा करता है कि वह कुछ छिपाना चाहती है। सीपीआई(एम) मजदूरों के साथ चट्टान की तरह खड़ी है। हम कानूनी सहायता से लेकर हर स्तर पर संघर्ष में साथ देंगे।”

श्रमिक नेता गंगेश्वर शर्मा ने कहा:
“मजदूरों के जीवन और जीविका को बेहतर बनाने तथा पुलिसिया दमन से प्रभावित श्रमिकों को मदद देने का हमारा सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। मजदूरों के मुद्दों पर अभियान को और तेज किया जाएगा।”

सीपीआई(एम) नोएडा गौतमबुद्ध नगर कमेटी यह मांग करती है कि:
1. जेल में बंद सभी मजदूरों को तत्काल रिहा किया जाए और झूठे मुकदमे वापस लिए जाएं। 2. नौकरी से निकाले गए सभी मजदूरों को ससम्मान बहाल किया जाए। 3. पुलिस हिरासत में मारपीट के दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो। 4. ट्रेड यूनियन बनाने के संवैधानिक अधिकार की गारंटी की जाए।
मजदूरों पर दमन, गिरफ्तारियाँ और छँटनी यह स्पष्ट करती हैं कि श्रमिक अधिकारों पर लगातार हमले हो रहे हैं। लेकिन मजदूरों की एकता, संगठन और सामूहिक प्रतिरोध ही इन हमलों का सबसे सशक्त जवाब है।

 

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