उत्तर प्रदेश में विभिन्न अभियंत्रण विभागों में जूनियर इंजीनियर के 4612 पद पर सिर्फ डिप्लोमा होल्डर्स होंगे भर्ती
सर्वोच्च न्यायालय ने ग्रेजुएट इंजीनियरिंग स्टूडेन्ट वेलफेयर एसोसिएशन की विशेष अनुमति याचिका को किया डिसमिस
सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय खण्डपीठ लखनऊ के निर्णय पर लगायी मुहर
उच्च न्यायालय खण्ड पीठ लखनऊ की डबल बेंच ने डिप्लोमा के पक्ष में दिया था फैसला। ग्रेजुएट इंजीनियरिंग स्टूडेन्ट वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा हाईकोर्ट के फैसले क सर्वोच्च न्यायालय में दी गयी थी चुनौती
विभिन्न विभागों में जूनियर इंजीनियर के 4612 पदों पर हो रही है भर्ती
अधीनस्थ चयन आयोग द्वारा करायी गयी 03 मई को जूनियर इंजीनियर्स की लिखित परीक्षा
* डिग्रीधारियों द्वारा याचिका में 13 अभियंत्रण विभागों की सेवा नियमावली को दी गई थी चुनौती –
*उ0प्र0 डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ ने किया था याचिका का विरोध
* याचिका ड
लखनऊ : सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 29 मई 2026 को ग्रेजुएट इंजीनियरिंग स्टूडेन्ट वेलफेयर एसोसिएशन की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए जूनियर इंजीनियर भर्ती में ग्रेजुएट इंजीनियर के दावे को खारिज कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ग्रेजुएट इंजीनियरिंग स्टूडेन्ट वेलफेयर एसोसिएशन की विशेष अनुमति याचिका को खारिज करते हुए उच्च न्यायालय खण्ड पीठ लखनऊ की डिविजन बेंच के फैसले पर मुहर लगा दी।
उच्च न्यायालय द्वारा एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए निर्देश दिया है कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न अभियंत्रण विभागों में जूनियर इंजीनियर के पद पर सिर्फ डिप्लोमा होल्डर्स अभ्यर्थी ही भर्ती हो सकेंगे। न्यायालय ने डिग्री होल्डर्स अभ्यर्थियों को जूनियर इंजीनियर के पद पर भर्ती हेतु अपात्र माना है। उल्लेखनीय है कि अधीनस्थ चयन आयोग द्वारा उत्तर प्रदेश के विभिन्न अभियंत्रण विभागों में जूनियर इंजीनियर के 4612 पदों पर भर्ती हेतु विज्ञापन निकाला गया था। विज्ञापन में सिर्फ डिप्लोमा होल्डर्स को ही आवेदन करने हेतु पात्र बताया गया था। डिग्री होल्डर्स अभ्यर्थियों द्वारा इस विज्ञापन को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल की। उच्च न्यायालय में महासंघ द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता के माध्यम से अपना पक्ष रखा गया। विस्तृत सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने डिग्री होल्डर्स की रिट याचिका डिस्मिस कर दी तथा अंतरिम आदेश समाप्त कर दिया। इस याचिका में डिग्री होल्डर्स ने 13 अभियंत्रण विभागों की सेवा नियमावली को भी चुनौती दी ।
उ.प्र. डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ द्वारा इस याचिका का विरोध किया गया। उच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय 20 अप्रैल 2026 के विरूद्ध ग्रेजुएट इंजीनियरिंग स्टूडेन्ट वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की गयी। इं. एन.डी. द्विवेदी प्रान्तीय अध्यक्ष डि.इं.सं. लोक निर्माण विभाग को सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय में महासंघ की तरफ से प्रभावी पैरवी हेतु अधिकृत किया गया। इं. एन.डी. द्विवेदी ने विद्वान अधिवक्ताओं के माध्यम से न्यायालय में अपना पक्ष प्रभावी तौर रखवाया। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विस्तृत सुनवाई के उपरान्त 29 मई 2026 को ग्रेजुएट इंजीनियरिंग स्टूडेन्ट वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका को खारिज करते हुए डिग्री होल्डर्स के क्लेम का समाप्त कर दिया तथा उच्च न्यायालय के फैसले पर मुहर लगा दी। उल्लेखनीय है कि 03 मई 2026 को आयोग द्वारा जूनियर इंजीनियर की भर्ती परीक्षा आयोजित की जा चुकी है। सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आने के पश्चात अब डिग्री होल्डर्स भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो गये है। इस प्रकार अब विभिन्न अभियंत्रण विभागों में जूनियर इंजीनियर्स के 4612 पदों पर सिर्फ डिप्लोमा होल्डर अभ्यर्थियों की भर्ती का रास्ता साफ हो गया है।
ज्ञातव्य हो कि पूर्व में भी वर्ष 2016 में डिग्री होल्डर्स अभ्यर्थियों द्वारा जूनियर इंजीनियर्स के पदों पर होने वाली भर्ती पक्रिया को चुनौती दी गई थी। उच्च न्यायालय द्वारा इन्हें अंतरिम राहत भी दी गई थी परन्तु उ.प्र. डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ द्वारा इम्पलीडमेंट दाखिल करते हुए याचिका का विरोध किया गया था। परिणाम स्वरूप उच्च न्यायालय की सिंगिल एवं डबल बेंच द्वारा डिप्लोमा के पक्ष में फैसला दिया गया था। डिग्री होल्डर्स द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में भी चुनौती दी गई थी। परन्तु महासंघ के प्रयास से विशेष अनुमति याचिका सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निरस्त कर दी गई थी। पुनः वर्ष 2018 में जूनियर इंजीनियर्स के पदों पर भर्ती के समय भी डिग्री होल्डर्स द्वारा चुनौती दी गई थी, यह प्रकरण उच्च न्यायालय इलाहाबाद की वृहद खण्ड पीठ को संदर्भित किया गया था। माननीय तीन न्यायमूर्तिगण की वृहद पीठ द्वारा डिप्लोमा होल्डर्स के पक्ष में फैसला सुनाया गया था। डिग्री होल्डर्स द्वारा वृहद पीठ के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा डिग्री होल्डर्स की याचिका को निरस्त कर दिया गया था। इस प्रकार डिप्लोमा होल्डर्स अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला दिया गया था। पुनः इस बार डिप्लोमा होल्डर्स के पक्ष में फैसला दिया गया है। वर्ष 2016 एवं 2018 में भी सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय में प्रभावी पैरवी इं. एन.डी. द्विवेदी द्वारा की गई थी। उ.प्र. डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के प्रान्तीय अध्यक्ष इं. एच.एन. मिश्र द्वारा इस फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए सभी को शुभकामनायें प्रेषित किया गया। इं. एन.डी. द्विवेदी ने फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए बेरोजगार डिप्लोमा अभ्यर्थियों को उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनायें प्रेषित की।



