जनता द्वारा चुना गया प्रधान अब जनता नहीं, बल्कि प्रशासन के आदेश पर काम करेगा,यह पंचायत लोकतंत्र नहीं, ‘प्रशासन राज’ है : सुनील सिंह

लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार का यह आदेश पंचायत लोकतंत्र और गांवों की स्वायत्तता पर सीधा हमला है। जिस ग्राम प्रधान को जनता ने अपने वोट से चुना, उसे अब “प्रशासक” बनाकर जिला प्रशासन के अधीन कर दिया गया है। यह लोकतांत्रिक जनप्रतिनिधियों को सरकारी कर्मचारी जैसी स्थिति में धकेलने की साजिश है।
लोकदल एवं राष्ट्रीय पंचायत संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व एम.एल. सी सुनील सिंह ने इस आदेश का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि सरकार का यह कदम साफ दिखाता है कि भाजपा पंचायत चुनावों से डर चुकी है। इसलिए चुनाव कराने के बजाय गांवों में “Administrator Raj” लागू किया जा रहा है।
सरकार के आदेश में साफ लिखा गया है कि निवर्तमान प्रधान कोई बड़ा या नीतिगत फैसला नहीं ले सकेंगे। यहां तक कि विशेष परिस्थितियों में भी उन्हें जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी से अनुमति लेनी होगी। यानी अब गांव का चुना हुआ प्रतिनिधि जनता के प्रति नहीं, बल्कि सरकारी अफसरों के प्रति जवाबदेह बना दिया गया है।
ग्राम पंचायतें जनता की संस्था हैं, नौकरशाही की शाखा नहीं। भाजपा सरकार गांव की स्वायत्तता, किसानों की आवाज़ और जनता के अधिकारों को कमजोर कर पंचायत व्यवस्था को प्रशासनिक कब्जे में लेना चाहती है।
यदि सरकार को लोकतंत्र पर भरोसा है तो पंचायत चुनाव तुरंत घोषित करे। जनता के जनादेश का अपमान बंद करे और चुने हुए प्रतिनिधियों को सरकारी “Administrator” बनाकर लोकतंत्र की हत्या करना बंद करे।


