चबूतरा थियेटर: जिसने संवाद से बदली ग्रामीण युवाओं की सोच
मदर सेवा संस्थान की पहल दिखाती है कि बदलाव के लिए किसी बड़े हॉल या तामझाम की जरूरत नहीं होती;

लखनऊ (बीकेटी): उत्तर प्रदेश की राजधानी के ग्रामीण अंचल कोटवा में ‘मदर सेवा संस्थान’ की एक अनूठी पहल ‘चबूतरा थियेटर पाठशाला’ युवाओं को नई दिशा दे रही है। हाल ही में आयोजित ‘युवा संवाद’ के दौरान गाँव के किशोरों और युवाओं ने न केवल अपनी समस्याओं पर खुलकर बात की, बल्कि समाज को बेहतर बनाने का संकल्प भी लिया।
सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ एकजुट युवा इस संवाद का मुख्य केंद्र तीन बड़े मुद्दे रहे: नशामुक्ति, शिक्षा का महत्व और बाल विवाह का विरोध। चर्चा के दौरान युवाओं ने माना कि नशा उनके समुदाय के भविष्य को खोखला कर रहा है। उन्होंने शपथ ली कि वे न केवल खुद को इससे दूर रखेंगे, बल्कि अपने परिवार और दोस्तों को भी जागरूक करेंगे।
शिक्षा ही है एकमात्र रास्ता
संवाद में इस बात पर जोर दिया गया कि ‘पढ़ाई’ ही वह चाबी है जिससे गरीबी और पिछड़ेपन के ताले खुल सकते हैं। युवाओं ने एक-दूसरे को प्रेरित किया कि परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी हों, शिक्षा का साथ नहीं छोड़ना है। साथ ही, समाज में गहराई तक पैठी ‘बाल विवाह’ जैसी प्रथा के खिलाफ भी युवाओं ने अपनी आवाज बुलंद की।
संवाद की ताकत
थियेटर पाठशाला के इस मंच ने युवाओं को अपनी बात बेबाकी से रखने का साहस दिया है। चबूतरे पर बैठकर हुई इस चर्चा में यह उभरकर आया कि युवा अब महज मूकदर्शक नहीं रहना चाहते, बल्कि वे अपने गाँव और समुदाय में ‘चेंज मेकर’ (बदलाव लाने वाले) बनना चाहते हैं।
मदर सेवा संस्थान की यह पहल दिखाती है कि बदलाव के लिए किसी बड़े हॉल या तामझाम की जरूरत नहीं होती; एक पेड़ की छाँव और खुला चबूतरा भी वैचारिक क्रांति का केंद्र बन सकता है। इन युवाओं का जोश यह उम्मीद जगाता है कि कोटवा बीकेटी का आने वाला कल नशामुक्त, शिक्षित और जागरूक होगा।



