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बुलबुल के सुरों में रंगों की उड़ान

टेम्परा कार्यशाला का सृजनात्मक समापन, प्रतिभागी छात्रों को प्रमाण पत्र दिया गया

लखनऊ । लखनऊ पब्लिक कॉलेज, सहारा स्टेट शाखा के सजीव एवं कलात्मक परिसर में फ्लोरोसेंस आर्ट गैलरी के सहयोग से “सौंदर्य एवं सांस्कृतिक विकास कार्यक्रम (2026–27)” के अंतर्गत आयोजित पाँच दिवसीय टेम्परा पेंटिंग कार्यशाला का प्रेरणादायक समापन कृतियों की प्रदर्शनी, मंचन और अतिथियों के सारगर्भित वक्तव्यों के साथ संपन्न हुआ। “Voice of Nature and Emotion: BULBUL” शीर्षक से आयोजित इस कार्यशाला में कक्षा 6 से 8 तक के 40 विद्यार्थियों की रचनात्मक ऊर्जा, संवेदनशीलता और उत्साह स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ।

इस पाँच दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति अनुराग, सौंदर्यबोध, भावनात्मक अभिव्यक्ति तथा पर्यावरणीय संवेदनशीलता का विकास करना था। समापन अवसर पर सहायक निदेशक, राज्य संग्रहालय लखनऊ डॉ. मीनाक्षी खेमका, कलाकार राजीव रावत, मूर्तिकार विकास प्रताप सिंह, छापाकलाकार संध्या यादव तथा क्यूरेटर भूपेंद्र अस्थाना की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का आरंभ अतिथियों द्वारा विद्यार्थियों की टेम्परा माध्यम में निर्मित ‘बुलबुल’ विषयक कृतियों के अवलोकन से हुआ। अतिथियों ने न केवल कृतियों की सराहना की, बल्कि विद्यार्थियों से संवाद स्थापित कर उनकी सोच और अभिव्यक्ति को भी समझा। इसके पश्चात विद्यार्थियों द्वारा बुलबुल एवं अन्य पक्षियों पर आधारित एक संगीतमय कहानी-प्रस्तुति दी गई, जिसने उपस्थित सभी दर्शकों का मन मोह लिया।
अपने वक्तव्य में डॉ. मीनाक्षी खेमका ने सभी 40 प्रतिभागी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों में कला और प्रकृति के प्रति समर्पण भाव जागृत करते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कला केवल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि विषय की गहराई को समझने की प्रक्रिया भी है। उनके अनुसार, “बुलबुल केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि वह जीवन में संगीत और संवेदना का संचार करती है।”
कलाकार राजीव रावत ने कार्यशाला की संकल्पना की सराहना करते हुए कहा कि इसमें प्राकृतिक तत्वों का समावेश अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने बुलबुल की विभिन्न प्रजातियों और उनकी विशेषताओं पर रोचक जानकारी साझा की। वहीं मूर्तिकार विकास प्रताप सिंह ने कहा कि बच्चों को कला के माध्यम से प्रकृति की संवेदनाओं से जोड़ना एक उत्कृष्ट प्रयास है, जिसके लिए विद्यालय और गैलरी दोनों बधाई के पात्र हैं।
छापाकलाकार संध्या यादव ने टेम्परा तकनीक की विशेषताओं और उसके प्रयोगों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ बच्चों को विभिन्न कला विधाओं से परिचित कराती हैं और उनमें जिज्ञासा उत्पन्न करती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रकृति का सूक्ष्म अवलोकन कर उसे दृश्य भाषा में व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया तथा टेम्परा तकनीक का सजीव प्रदर्शन भी किया।
गैलरी क्यूरेटर भूपेंद्र अस्थाना ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि “बुलबुल – प्रकृति और भावना की आवाज़” केवल एक कार्यशाला नहीं, बल्कि प्रकृति और मानवीय संवेदनाओं के मध्य एक सजीव सेतु है। उन्होंने बताया कि फ्लोरोसेंस आर्ट गैलरी और लखनऊ पब्लिक कॉलेज लंबे समय से इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को कला और प्रकृति के निकट लाने का प्रयास कर रहे हैं। यह पहल बच्चों में सौंदर्य दृष्टि, संवेदना और रचनात्मकता का कोमल विकास करती है तथा उन्हें अपनी भावनाओं को दृश्य रूप में व्यक्त करने का आत्मविश्वास प्रदान करती है।
नेहा सिंह, डायरेक्टर (अकादमिक एवं इनोवेशन) तथा फ्लोरोसेंस आर्ट गैलरी की संस्थापक निदेशक, ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कला शिक्षा केवल तकनीकी कौशल अर्जित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों में रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच और सांस्कृतिक संवेदनशीलता के विकास का एक सशक्त साधन है। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ विद्यार्थियों को अपनी आंतरिक कल्पनाशक्ति को अभिव्यक्त करने, आत्मविश्वास विकसित करने तथा विविध दृश्य-भाषाओं से जुड़ने का एक सार्थक मंच प्रदान करती हैं। उनके अनुसार, ऐसे प्रयास पारंपरिक कला विधाओं और समकालीन दृष्टिकोण के बीच सेतु का कार्य करते हैं, जिससे शिक्षा का समग्र अनुभव और अधिक समृद्ध होता है।
कला विभागाध्यक्ष राजेश कुमार ने बताया कि इस कार्यशाला में विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया, जिसमें उन्होंने रंग, बनावट और संयोजन के साथ उत्साहपूर्वक प्रयोग किए। विद्यार्थियों ने बुलबुल के स्वरूप, स्वभाव और प्रतीकात्मकता को समझते हुए उसे अपनी कृतियों में अभिव्यक्त करने का प्रयास किया।
कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्या मीना तांगड़ी ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि कला शिक्षा बच्चों में रचनात्मकता, धैर्य और भावनात्मक बुद्धिमत्ता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उप-प्रधानाचार्य अमित, हेडमिस्ट्रेस मनीषा एवं अन्य शिक्षकों ने भी इस पहल को विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।
कार्यशाला का संचालन कला शिक्षक जैसवार अभिषेक जयराम द्वारा किया गया, जिन्होंने विद्यार्थियों को टेम्परा पेंटिंग के इतिहास, तकनीक और माध्यम की विशेषताओं से परिचित कराया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के अभिभावक भी उपस्थित रहे, जिन्होंने बच्चों की रचनात्मक उपलब्धियों को सराहा। अतिथियों द्वारा सभी प्रतिभागी छात्रों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया।

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