उत्तर-प्रदेशनई दिल्लीबड़ी खबरलखनऊ

मजदूरों को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाने से रोकना चाहती हैं डबल इंजन सरकार

भाकपा ने की कड़े शब्दों में निन्दा

नई दिल्ली/ लखनऊ : मजदूर वर्ग खासकर औद्योगिक मजदूरों की ज्वलंत मांगों को हल करने के बजाये भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन सरकारें और उद्यमी दोनों ही मजदूरों की आवाज को दमन के बल पर दबाने पर उतारू हैं। पीड़ित मजदूरों के आक्रोश का परिणाम सामने आने के बाद भी ये लोग एक ओर मजदूर आंदोलन को बदनाम कर रहे हैं, अथवा उनके खिलाफ दमनचक्र चलाये हुये हैं।

हालात इस हद तक खराब हैं कि मजदूर वर्ग के अंतर्राष्ट्रीय पर्व “मई दिवस” को मनाने से रोकने की साजिशें चल रही हैं। अपनी इस संभावित कारगुजारी को जायज ठहराने को उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रमिक दिवस पर औद्योगिक अशांति फैलने का शिगूफ़ा खड़ा किया है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी सरकार के इस प्रपोगंडा को पूरी तरह अनुचित ठहराती है और  सरकार से मांग करती है कि वह मई दिवस समारोहों में कोई भी बाधा डालने से बाज आये।

भाकपा की ओर से जारी बयान में राष्ट्रीय सचिव डा. गिरीश ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री की अधिकारियों के साथ बैठक के बाद जारी बयान से पता चलता है कि मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से भारी सतर्कता बरतने और कड़े कदम उठाने के निर्देश दिये हैं। वकौल मुख्यमंत्री “30 अप्रेल से 2 मई के बीच श्रमिकों द्वारा दोबारा अशांति पैदा की जा सकती है, जिसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। कड़े से कड़े कदम उठाए जाने चाहिए।“

भाकपा कहना चाहती है कि नोएडा, हरियाणा अथवा एनसीआर में हुयी श्रमिक अशान्ति के लिये मजदूर  नहीं सरकार और सिस्टम जिम्मेदार है। मजदूरों को नियमानुसार न्यूनतम वेतनमान, ओवर टाइम, अवकाश और सुरक्षा आदि देने के बजाय उन्हें ठेकेदारों के हवाले कर रखा है। प्रशासन और श्रम विभाग मजदूरों की व्यथा सुनने के बजाये उद्यमियों को लूट की खुली छूट दिये हुये हैं। और यह सारे देश में हो रहा है।

नोएडा के आंदोलन से सशंकित उद्यमी जगह जगह आवाज उठाने वाले मजदूरों को उद्योगों से जबरिया बाहर निकाल रहे हैं और अपने गुंडों और पुलिस प्रशासन के बल पर उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं। कल ही अहमदाबाद स्थिति सुजुकी कंपनी के कर्मचारी को आंदोलन की आशंका में अगवा कर लिया गया है, मगर प्रशासन निष्क्रिय बना हुआ है।

डा. गिरीश ने कहा मई दिवस मजदूरों का हक मांगने का उत्सव है, अराजकता फैलाने का नहीं। आजाद भारत में एक भी ऐसा उदाहरण नहीं मिलता जब मजदूरों ने मई दिवस पर अशान्ति फैलाई हो। योगी का बयान ‘आरएसएस मार्का’ शिगूफ़ा है जिसकी कड़ी भर्त्सना की जानी चाहिये। सरकार को मजदूरों के जीवन को बेहतर बनाने के लिये कदम उठाने चाहिये और अन्य कमजोर वर्गों की तरह उन्हें लांच्छित करने तथा डराने- धमकाने की कारगुजारियों से बाज आना चाहिये।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button