पदोन्नति में हो रही देरी से क्षुब्ध – उत्तर प्रदेश औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
अन्तिम विकल्प उच्च न्यायालय की शरण की तैयारी

लखनऊ : उत्तर प्रदेश औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान कर्मचारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष अखिलेश कुमार सिंह ने प्रदेश के राजकीय आईटीआई संस्थानों में अनुदेशक से कार्यदेशक पदोन्नति की प्रक्रिया में हो रही अत्यधिक देरी पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अब तक पदोन्नति प्रक्रिया पूर्ण नहीं की गई है, जिससे पात्र कर्मचारियों में गहरी निराशा व्याप्त है।
संघ द्वारा मुख्यमंत्री को प्रेषित पत्र में कहा गया है कि पदोन्नति संबंधी मामले में शासन, कार्मिक विभाग एवं निदेशालय को बार-बार अवगत कराया गया, किंतु कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। संगठन ने बताया कि 28 अप्रैल, 14 मई, 23 जून, 3 जुलाई, 7 अगस्त तथा 26 सितम्बर 2025 को निदेशक प्रशिक्षण महोदय से भेंट कर पदोन्नति प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कराने का आग्रह किया गया था, परंतु चयन वर्ष 2024-25 (30 जून 2025 तक) की प्रक्रिया चरित्र प्रविष्टि उपलब्ध न होने के कारण समाप्त हो गई।मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा 2 जुलाई 2025 को यह निर्देश जारी किया गया था कि 30 जून 2026 तक की समस्त रिक्तियों की गणना कर 15 अगस्त 2025 तक पदोन्नति प्रक्रिया पूर्ण की जाए। तत्पश्चात प्रमुख सचिव कार्मिक एम. देवराज द्वारा 3 सितम्बर 2025 को पुनः 15 सितम्बर 2025 तक प्रक्रिया पूर्ण करने हेतु अनुस्मारक भी जारी किया गया, लेकिन निर्धारित समयसीमा व्यतीत हो चुकी है।संघ ने कहा कि अन्य सभी संवर्गों की पदोन्नति चयन वर्ष 2024-25 तक पूर्ण हो चुकी है — यहां तक कि लिपिक संवर्ग की पदोन्नति के लिए हाल ही में चरित्र प्रविष्टि मांगी गई और एक माह में प्रक्रिया पूर्ण कर दी गई, परंतु अनुदेशक से कार्यदेशक पदोन्नति अब भी लंबित है। इसके चलते अनेक पात्र कर्मचारी बिना पदोन्नति पाए सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिससे कर्मचारियों में गहरी असंतोष की स्थिति है।संघ ने यह भी कहा कि मुख्य सचिव द्वारा सभी विभागों को कर्मचारी संगठनों से नियमित वार्ता करने के निर्देश दिए गए हैं, किंतु व्यावसायिक शिक्षा विभाग में इन निर्देशों की निरंतर अवहेलना की जा रही है। इसके कारण कर्मचारियों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।कर्मचारी संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 30 अक्टूबर 2025 तक पदोन्नति प्रक्रिया पूर्ण नहीं की गई, तो संगठन उच्च न्यायालय की शरण लेने के साथ ही राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद अध्यक्ष जे. एन. तिवारी के संरक्षण में आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।



