लखनऊ का 500 वर्ष से अधिक प्राचीन हनुमान मंदिर
छाछी-कुंआ के महावीर (हनुमान जी) मंदिर

आलेख- एडवोकेट के. सरन
हनुमान जी का यह प्राचीन मन्दिर जिसकी महिमा अपार व असाधारण हैऔर यह हनुमान भक्तों तथा लखनऊ विशेषकर पुराने लखनऊ मे रहने वाले लोगों की आस्था का असाधारण मन्दिर है।,मेडिकल कालेज चौराहे से रकाब गंज होते हुए चारबाग आने वाली सड़क
जो सुभाष मार्ग कहलाती है पर मेड़िकल कालेज चौराहे से राजा बाजार के बीच में बायीं ओर स्थित एक मोहल्ला छाछू कुआं कहलाता है।यहीं ये मन्दिर स्थितहै।
इसकी ऐतिहासिकता बताते हुए आ-डा योगेश प्रवीन बताते हैं कि
लगभग 500 वर्ष पूर्व 16 वी शताब्दी में जब उक्त स्थान पर जंगल ही जंगल था,एक संत जिनका नाम परमेवर दास था,आकर एक कुऐं के पास रूके थे।रात मे उन्हे स्वप्न
मे हनुमान जी ने दर्शन देकर कहा कि मैं यहां कुऐं मे विश्राम कर रहा हूं जिसमे सुबह छांछ मिलेगी।
अगले दिन उन्हे कुऐं मे छांछ ही छांछ भरी थी और हनुमान जी की मूर्ति भी। हनुमान जी की उस मूर्ति को वहीं उन संत श्री ने स्थापित कर दिया।तीन दिनों तक कुऐं से बराबर छांछ निकलती रही ।तबसे वह कुआं छाछी कुंआं के नाम से प्रसिद्ध हुआ।आबाद होने और उत्तरोत्तर विकसित होने के बाद भी यह स्थान अपने मूल नाम से जाना गया आज भी इसका वही नाम छाछी कुआं है। ऐसा भी कहा जाता है कि कालान्तर में श्री राम चरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी भी यहांकुछ दिन रूके थे और इस मूर्ति की पूजा-अर्चना भी की थी।
लखनऊ मे अलीगंज स्थित हनुमान-मन्दिर की तरह यहा भी जेठ महिने के पहले मंगलवार को,जिसे बड़ा मंगल भी कहते हैं,पर यहां विशेष मेला और भीड़ होती है।यहां तुलसीराम का अहाता और पुराना ठाकुर द्वारा भी है।योगेश जी के अनुसार इस वैष्णव रामानन्दी ठाकुरद्वारे का निर्माण मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल मे 1585 मे हुआ था।


